नई दिल्ली | 17 फरवरी, 2026 “नमस्कार, आप देख रहे हैं मीडिया वॉच। दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन कली पुरी ने एक बेहद अहम मुद्दा उठाया है। उन्होंने साफ कहा कि एआई का इस्तेमाल पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए। कली पुरी ने टेक कंपनियों को आगाह करते हुए कहा कि पत्रकारिता को केवल एआई मॉडल के लिए ‘कच्चा माल’ नहीं समझा जाना चाहिए।” न्यूज़ हेडलाइन्स (Main Highlights) 9 सूत्रीय चार्टर: कली पुरी ने निष्पक्षता, जवाबदेही और पारस्परिकता (Fairness, Accountability and Reciprocity) पर आधारित 9 नियम पेश किए। पत्रकारिता का मूल्य: उन्होंने मांग की कि एआई सिस्टम द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले न्यूज़ कंटेंट का उचित मूल्य (Fair Value) मीडिया संस्थानों को मिलना चाहिए। डिजिटल साम्राज्यवाद पर वार: कली पुरी ने ‘डिजिटल इंपीरियलिज्म’ के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि वैश्विक टेक प्लेटफॉर्म भारतीय मीडिया के साथ भेदभाव न करें। इंसानी कंट्रोल जरूरी: उन्होंने ‘AI सैंडविच’ मॉडल का सुझाव दिया—यानी शुरुआत और अंत में इंसान का नियंत्रण और बीच में एआई की मदद। कली पुरी का 9 सूत्रीय चार्टर: क्या हैं प्रमुख मांगें? [रिपोर्टर वॉयसओवर]कली पुरी ने डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) के सत्र में बोलते हुए कहा कि एआई के दौर में विश्वसनीय पत्रकारिता की नींव को मजबूत करना जरूरी है। चार्टर की मुख्य बातें: कंटेंट की कीमत: न्यूज़ का उपयोग कैसे हो रहा है, इसमें पारदर्शिता हो और उसका सही दाम मिले। ट्रेसेबिलिटी: खबर कहाँ से आई, इसका श्रेय (Attribution) देना लोकतांत्रिक सिद्धांत होना चाहिए। एआई ‘भ्रम’ पर जुर्माना: अगर एआई गलत जानकारी (Hallucinations) फैलाता है, तो भारी जुर्माना लगना चाहिए। टेक कंपनियों से सवाल: दुनिया की टॉप 7 टेक कंपनियां (Magnificent Seven) अगर हमारा कंटेंट लेती हैं, तो बदले में वे समाज को क्या दे रही हैं? सत्यापित कंटेंट का सम्मान: विश्वसनीय संस्थानों द्वारा तैयार खबरों का मूल्यांकन अलग होना चाहिए। ‘एआई सैंडविच’ और इंसान की भूमिका कली पुरी ने स्पष्ट किया कि इंडिया टुडे ग्रुप तकनीक का विरोधी नहीं है। ग्रुप पिछले ढाई साल से एआई एंकर्स और वॉइस क्लोनिंग का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि— “जवाबदेही हमेशा एक इंसान की होनी चाहिए। हम एआई की कहानियां नहीं, बल्कि अपनी कहानियां सुनाना चाहते हैं।” इंडस्ट्री का समर्थन इस 9 सूत्रीय ढांचे को मीडिया जगत का भारी समर्थन मिला। द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे बड़े मीडिया हाउस के प्रमुखों ने इस पर सहमति जताई। सभी का मानना है कि अगर एआई समरी के कारण न्यूज़ ट्रैफिक गिरता है, तो पत्रकारिता का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। निष्कर्ष समिट में यह संदेश साफ था कि एआई एक बड़ा अवसर है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है। कली पुरी ने चेतावनी दी कि अगर आज पत्रकारिता को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में इसके नुकसान की भरपाई करना बहुत महंगा पड़ेगा। [एंकर साइन-ऑफ]“उम्मीद है कि सरकार और टेक कंपनियां इस चार्टर पर गंभीरता से विचार करेंगी। न्यूज़ डेस्क से मैं [आपका नाम], कैमरामैन के साथ।” FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation ‘धान की बाली’ की आंधी में उड़ा विपक्ष, 17 साल बाद तारिक रहमान की बांग्लादेश की सत्ता में वापसी! “साल का पहला सूर्य ग्रहण LIVE, जानें पल-पल की खबर”