नई दिल्ली: आमतौर पर विवाद किताबों के प्रकाशित होने के बाद होते हैं, लेकिन पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के मामले में तूफान इसके आने से पहले ही आ गया है। इस किताब के कुछ कथित अंशों को लेकर संसद में तीखी बहस छिड़ गई है।

विवाद की मुख्य वजह:

  • राहुल गांधी का आरोप: लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने इस किताब के कुछ अंश पढ़ते हुए दावा किया कि अगस्त 2020 में चीन के साथ लद्दाख गतिरोध के दौरान एक अहम मोड़ आया था।
  • “जो उचित समझो, वो करो”: राहुल गांधी के अनुसार, जब जनरल नरवणे ने चीनी टैंकों के आगे बढ़ने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और NSA अजीत डोभाल से निर्देश मांगे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश था— “जो उचित समझो, वो करो” (Do what you think is right)
  • राजनीतिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना: राहुल गांधी ने तर्क दिया कि पीएम का यह निर्देश ‘राजनीतिक जिम्मेदारी’ से पल्ला झाड़ने जैसा था, जिसे सेना पर छोड़ दिया गया।

सरकार का पलटवार:

सरकार ने राहुल गांधी के इन बयानों और एक अप्रकाशित (Unpublished) किताब के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और अन्य मंत्रियों ने तर्क दिया कि:

  1. ऐसी किताब का हवाला देना जो अभी तक बाजार में आई ही नहीं है, संसदीय नियमों का उल्लंघन है।
  2. यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

आगे क्या?

लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने राहुल गांधी को इस अप्रकाशित किताब का जिक्र करने से रोक दिया है। हालांकि, इस घटना ने 2020 के गलवान और लद्दाख गतिरोध को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं।


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