अमेरिका-भारत के दो सबसे प्रभावशाली उद्योग निकायों— US-India Business Council (USIBC) और US-India Strategic Partnership Forum (USISPF)—ने बजट 2026-27 को दूरदर्शी बताते हुए कहा है कि यह वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों को सकारात्मक संदेश देता है। प्रमुख बिंदु जो चर्चा में रहे: क्लाउड और डेटा सेंटर को बड़ी राहत: 2047 तक विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए लॉन्ग-टर्म टैक्स हॉलिडे (कर अवकाश) की घोषणा को ‘गेम चेंजर’ बताया गया है। USISPF के अनुसार, यह कदम भारत के डेटा इकोसिस्टम को उसी तरह बदल सकता है जैसे 2000 के दशक में आईटी (IT) सुधारों ने किया था। टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, AI मिशन और नेशनल क्वांटम मिशन जैसे कदमों की प्रशंसा की गई है। USIBC अध्यक्ष अतुल केशप के अनुसार, ये पहल भारत को नेक्स्ट-जेन तकनीक और लचीली सप्लाई चेन का केंद्र बनाएंगी। सीमा शुल्क (Customs) और लॉजिस्टिक्स में सुधार: AI-पावर्ड चेकिंग और कंटेनरों की फेस्ड स्कैनिंग से बंदरगाहों पर लगने वाला समय (dwell time) कम होगा। इसके अलावा, लिथियम-आयन सेल, महत्वपूर्ण खनिजों, सौर विनिर्माण और दवाओं पर सीमा शुल्क घटाने से निर्यात में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। टैक्स और बैंकिंग सुधार: आईटी (IT) सेवाओं और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए टैक्स विवादों को कम करने और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए उच्च स्तरीय समिति के गठन का स्वागत किया गया है। ऊर्जा और स्वास्थ्य: कार्बन कैप्चर स्कीम (₹20,000 करोड़) और मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए 5 नए हब बनाने जैसे कदमों को भारत की ऊर्जा परिवर्तन और स्वास्थ्य अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला बताया गया है। निष्कर्ष: जहाँ दोनों निकायों ने बजट की दिशा की सराहना की है, वहीं उन्होंने इसके सटीक क्रियान्वयन (Execution) और निजी क्षेत्र की गहरी भागीदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation ट्रंप का दावा बनाम जमीनी हकीकत: क्या वाकई रूसी तेल की जगह ले पाएगा अमेरिकी तेल? भारत-EU व्यापार समझौता: पाकिस्तान के ‘GSP+’ फायदे पर फिरा पानी, 10 मिलियन नौकरियों पर मंडराया संकट