भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित अंतरिम व्यापार ढांचे को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस का बयान

  • कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने संयुक्त बयान को “विवरणों पर मौन” बताया।
  • उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि “सारे गले मिलने और फोटो-ऑप्स का कोई फायदा नहीं हुआ।”
  • रमेश ने मशहूर गीत की पंक्ति “दोस्त दोस्त ना रहा…” का हवाला देते हुए कहा कि यह समझौता भारत के हितों के खिलाफ है।
  • उनका दावा है कि भारत अब रूस से तेल आयात नहीं करेगा और अमेरिकी किसानों को फायदा पहुँचाने के लिए आयात शुल्क घटाएगा, जिससे भारतीय किसान प्रभावित होंगे।
  • उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका से आयात तीन गुना बढ़ जाएगा और भारत का व्यापार अधिशेष खत्म हो जाएगा।

शिवसेना (UBT) का आरोप

  • प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह समझौता बातचीत का नतीजा नहीं बल्कि अमेरिका का “आदेश” है जिसे भारत ने मान लिया।
  • उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने वही किया जो राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही सोशल मीडिया पर कहा था।

अन्य विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया

  • मनीष तिवारी (कांग्रेस) ने कहा कि औद्योगिक और कृषि क्षेत्र को बहुत ज्यादा खोल दिया गया है। उन्होंने संसद में इस पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
  • राजीव राय (सपा) ने इसे “देश की गरिमा पर समझौता” बताया और कहा कि किसानों की तबाही इसमें लिखी हुई है।
  • आगा सैयद मुन्तज़िर मेहदी (PDP) ने चेतावनी दी कि भारत को अपने आर्थिक हितों की रक्षा करनी चाहिए और यह समझौता किसी पूंजीपति वर्ग या ट्रंप को खुश करने के लिए नहीं होना चाहिए।

समझौते की मुख्य बातें

  • भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करेगा।
  • अगले पाँच वर्षों में भारत अमेरिका से ऊर्जा, विमान, धातु, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोल समेत 500 अरब डॉलर के सामान खरीदेगा।
  • दोनों देश जल्द ही इस ढांचे को लागू करेंगे और एक पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में काम करेंगे।

विपक्ष का कहना है कि यह समझौता भारत के किसानों और व्यापार संतुलन के लिए नुकसानदेह है, जबकि सरकार इसे ऐतिहासिक साझेदारी बता रही है।

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