पोर्ट ब्लेयर/नई दिल्ली | 17 फरवरी, 2026 | नेशनल डेस्क

“नमस्कार, आप देख रहे हैं ‘राष्ट्र की बात’। भारत के सबसे महत्वाकांक्षी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ ने एक बड़ी कानूनी बाधा पार कर ली है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस प्रोजेक्ट को रोकने से इनकार करते हुए इसकी पर्यावरणीय मंजूरी को बरकरार रखा है। 81,000 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को बदलेगा, बल्कि हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दादागिरी पर भी लगाम लगाएगा। आइए समझते हैं क्या है यह पूरा प्रोजेक्ट और क्यों यह भारत के लिए इतना खास है।”

न्यूज़ हेडलाइन्स (Main Highlights)

  • NGT का फैसला: जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने कहा कि प्रोजेक्ट की रणनीतिक महत्ता को नकारा नहीं जा सकता और इसमें पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं।
  • भारत का ‘हांगकांग’: इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य ग्रेट निकोबार को हांगकांग या सिंगापुर जैसा एक बड़ा शिपिंग और लॉजिस्टिक्स हब बनाना है।
  • रणनीतिक स्थिति: यह प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग ‘मलक्का जलडमरूमध्य’ (Strait of Malacca) के बेहद करीब है, जहाँ से चीन का अधिकांश व्यापार और ऊर्जा शिपमेंट गुजरता है।
  • बड़ा बुनियादी ढांचा: 166 वर्ग किमी में फैले इस प्रोजेक्ट में एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक टाउनशिप और बिजली संयंत्र शामिल हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट: क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?

[रिपोर्टर वॉयसओवर]
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की समुद्री सीमा पर एक नए युग की शुरुआत है। इसे भारत के दक्षिणतम बिंदु ‘इंदिरा पॉइंट’ से महज 9 किमी दूर विकसित किया जा रहा है।

प्रोजेक्ट के मुख्य आकर्षण:

  1. ट्रांसशिपमेंट पोर्ट: वर्तमान में भारत को अपने माल के लिए विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह पोर्ट दुनिया के पूर्व-पश्चिम समुद्री व्यापार के बड़े हिस्से को अपनी ओर खींचेगा।
  2. दोहरा उपयोग वाला हवाई अड्डा: यहाँ बनने वाला हवाई अड्डा नागरिक उड़ानों के साथ-साथ नौसेना और वायु सेना के परिचालन के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।
  3. ऊर्जा आत्मनिर्भरता: यहाँ 450-MVA का गैस और सौर ऊर्जा आधारित प्लांट लगाया जाएगा।

पर्यावरण और जनजातीय अधिकारों पर बहस

इस प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों ने चिंता जताई थी। दलील दी गई थी कि इससे लगभग 10 लाख पेड़ काटे जाएंगे और समुद्री पारिस्थितिकी (Eco-system) को नुकसान होगा।

NGT का रुख:

  • संतुलित दृष्टिकोण: ट्रिब्यूनल ने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी है।
  • जीव-जंतुओं की सुरक्षा: अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय को कछुओं, निकोबार मेगापोड और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए सख्त निर्देश दिए हैं।
  • कोरल रीफ: NGT ने विशेषज्ञ रिपोर्टों के आधार पर माना कि मुख्य प्रोजेक्ट क्षेत्र में कोई कोरल रीफ नहीं है, और छिटपुट संरचनाओं को वैज्ञानिक सलाह पर स्थानांतरित किया जाएगा।

चीन के लिए संदेश

विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट केवल आर्थिक नहीं बल्कि एक सैन्य अपग्रेड भी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, ग्रेट निकोबार में भारत की मजबूत उपस्थिति एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ का काम करेगी।

[एंकर साइन-ऑफ]
“कानूनी बाधाएं हटने के बाद अब उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट का काम तेज़ी से आगे बढ़ेगा। यह भारत की समुद्री भूगोल को बदलने वाला कदम साबित हो सकता है।

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