भारत में हाल के महीनों में रईसजादों की लग्जरी कारों से हुए हादसों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। कानपुर से लेकर पुणे और दिल्ली तक, इन ‘हिट एंड रन’ मामलों में रसूखदार परिवारों के नाम सामने आए हैं। यहाँ इन तीनों हाई-प्रोफाइल हादसों की वर्तमान स्थिति और जांच की रिपोर्ट है: 1. कानपुर: लेम्बोर्गिनी हिट एंड रन (ताजा मामला) घटना: कानपुर के पॉश इलाके में एक तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी ने साइकिल सवार को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। मुख्य आरोपी: तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा। जांच की स्थिति: पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर शिवम मिश्रा को गिरफ्तार किया था। आरोपी पर लापरवाही से गाड़ी चलाने और गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में मामला दर्ज है। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या हादसे के वक्त आरोपी नशे में था। 2. पुणे: पोर्श कार एक्सीडेंट (मई 2024) घटना: एक 17 वर्षीय नाबालिग ने नशे की हालत में अपनी पोर्श कार से दो सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को कुचल दिया था। जांच की स्थिति: यह मामला देश के सबसे चर्चित मामलों में से एक बना। जांच में सामने आया कि आरोपी के ब्लड सैंपल बदले गए थे ताकि शराब की पुष्टि न हो सके। अब तक की कार्रवाई: पुणे पुलिस ने आरोपी के पिता (विशाल अग्रवाल), दादा और सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों को गिरफ्तार किया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बाद में नाबालिग को सुधार गृह से रिहा करने का आदेश दिया, लेकिन मामला अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है और ‘ब्लड सैंपल टेम्परिंग’ की जांच जारी है। 3. दिल्ली: बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन (वरली/दिल्ली मामले) घटना: दिल्ली और मुंबई (वरली) में बीएमडब्ल्यू कारों से हुए हादसों ने सुरक्षा पर सवाल उठाए। वरली मामले में एक राजनेता के बेटे ने महिला को कुचल दिया था। जांच की स्थिति: दिल्ली के हालिया मामलों में पुलिस ने ‘जीरो टॉलरेंस’ दिखाते हुए आरोपियों को जेल भेजा है। वरली मामले में आरोपी मिहिर शाह को लंबी तलाश के बाद गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है और वैज्ञानिक साक्ष्यों (फॉरेंसिक रिपोर्ट) के आधार पर मुकदमा चल रहा है। इन मामलों में समानताएं: रसूख का इस्तेमाल: तीनों ही मामलों में रसूखदार परिवारों ने सबूत मिटाने या जांच को प्रभावित करने की कोशिश की। कानूनी सख्ती: सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट्स ने इन मामलों में कड़ी टिप्पणी करते हुए पुलिस को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। सार्वजनिक आक्रोश: इन हादसों के बाद ‘अमीर बनाम गरीब’ की बहस छिड़ गई है, जिससे प्रशासन पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दबाव बना है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation भारत के लिए क्यों ‘गुड न्यूज’ है तारिक रहमान की वापसी? अधूरे एक्सप्रेसवे पर अब नहीं लगेगा ‘प्रीमियम’ टोल