मुंबई: भारतीय फिल्म उद्योग के सबसे प्रसिद्ध कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (National Film Awards) में ‘बेस्ट कास्टिंग’ श्रेणी को शामिल न करने पर सवाल उठाए हैं। इण्डिया टुडे के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि जब ऑस्कर 2026 से इस श्रेणी को शुरू कर रहा है, तो भारत अभी भी पीछे क्यों है? इंटरव्यू की मुख्य बातें: कास्टिंग का महत्व: छाबड़ा के अनुसार, एक अच्छी कास्टिंग किसी भी फिल्म को 100% बदल सकती है। उन्होंने कहा, “हम केवल प्रदर्शन की प्रशंसा करते हैं, लेकिन उस अभिनेता को उस भूमिका में चुनने की कल्पना और निर्णय को भूल जाते हैं।” भाई-भतीजावाद पर चोट: मुकेश छाबड़ा ने बताया कि पेशेवर कास्टिंग सिस्टम फिल्म इंडस्ट्री के पुराने ‘कैंप’ और ‘ग्रुपिज्म’ को तोड़ता है। यह छोटे शहरों के कलाकारों को स्टार किड्स के साथ खड़े होने और अपनी योग्यता साबित करने का मौका देता है। बदलाव की उम्मीद: उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल या अगले साल तक न केवल राष्ट्रीय पुरस्कारों में, बल्कि अन्य सभी पुरस्कार समारोहों में भी कास्टिंग को एक आधिकारिक श्रेणी के रूप में जोड़ा जाएगा। काम बोलता है: ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘दंगल’, ‘धुरंधर’ और ‘बॉर्डर 2’ जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लोग अब कास्टिंग की अहमियत समझने लगे हैं। यह अब कोई पार्ट-टाइम काम नहीं, बल्कि एक गंभीर 24×7 पेशा है। पुरस्कार समिति से अपील: मुकेश छाबड़ा ने राष्ट्रीय पुरस्कार समिति से सीधा आग्रह किया— “हमारे समुदाय और पेशे का समर्थन करें। हम फिल्म व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, हमें नजरअंदाज न करें।” FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation “लाठी-डंडों से हमला, पड़ोसी की जान गई”बच्चों की झगड़े ने लिया खौफनाक रूप, भुवनेश्वर: छत पर धमाके का रोंगटे खड़े करने वाला वीडियो आया सामने; बम बनाते समय हुआ था विस्फोट, 2 की मौत