नई दिल्ली: हम रोज सुबह और शाम आसमान के बदलते रंगों को देखते हैं, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान बेहद दिलचस्प है। ‘इंडिया टुडे साइंस’ की इस नई सीरीज में हम रोजमर्रा के ऐसे ही अनुभवों के पीछे छिपे ‘क्यों’ और ‘कैसे’ को आसान भाषा में समझेंगे।

क्या आसमान का अपना कोई रंग होता है?

जी नहीं, आसमान का अपना कोई रंग नहीं होता। हम जो देखते हैं, वह वास्तव में पृथ्वी के वायुमंडल द्वारा फैलाया गया (scattered) सूरज का प्रकाश है।

आसमान नीला क्यों दिखता है?

सूर्य का प्रकाश हमें सफेद दिखता है, लेकिन यह सात रंगों से मिलकर बना है। नीले और बैंगनी रंग की तरंगें (wavelengths) छोटी होती हैं, जबकि लाल और नारंगी की लंबी।

  • रेले स्कैटरिंग (Rayleigh Scattering): जब सूरज की रोशनी वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो हवा में मौजूद गैस के अणु छोटी तरंगों यानी नीले प्रकाश को सभी दिशाओं में फैला देते हैं।
  • यही कारण है कि दिन के समय जब हम ऊपर देखते हैं, तो हमें आसमान नीला दिखाई देता है। हमारी आँखें बैंगनी के बजाय नीले रंग के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, इसलिए हमें यह नीला ही दिखता है।

सूर्यास्त और सूर्योदय के समय आसमान लाल क्यों होता है?

सुबह और शाम के समय सूरज क्षितिज (horizon) के पास होता है। इस समय सूरज की रोशनी को हमारी आँखों तक पहुँचने के लिए वायुमंडल की एक बहुत मोटी परत से होकर गुजरना पड़ता है।

  • इस लंबी यात्रा के दौरान, नीला और बैंगनी प्रकाश पूरी तरह से बिखर कर लुप्त हो जाता है।
  • केवल लंबी तरंगें यानी लाल, नारंगी और पीला रंग ही हमारी आँखों तक पहुँच पाते हैं। यही कारण है कि सूर्यास्त के समय आसमान में आग जैसी लालिमा दिखाई देती है।

धूल और बादलों का असर:

हवा में मौजूद धूल के कण, प्रदूषण और पानी की बूंदें इन रंगों को और भी गहरा और नाटकीय बना देती हैं। इसीलिए तूफान के बाद या धूल भरी शाम को सूर्यास्त और भी खूबसूरत दिखता है।

निष्कर्ष: सरल शब्दों में कहें तो, दिन का नीला आकाश नीले प्रकाश के बिखरने का परिणाम है, और शाम का लाल आकाश लंबी दूरी तय करने के बाद बचे हुए लाल प्रकाश का कमाल है। हमारा वायुमंडल सूरज की रोशनी के लिए एक विशाल फिल्टर की तरह काम करता है।


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