नई दिल्ली: पटियाला हाउस कोर्ट के जज देवेंद्र कुमार गर्ग ने शिखर धवन और उनकी पूर्व पत्नी आयशा मुखर्जी के बीच संपत्ति निपटान (Property Settlement) के समझौतों को अमान्य (Null and Void) घोषित कर दिया है। कोर्ट ने माना कि ये समझौते “धमकी, जबरन वसूली और धोखाधड़ी” के जरिए कराए गए थे।

अदालत के फैसले के मुख्य बिंदु:

  • ब्याज के साथ वापसी: कोर्ट ने आयशा को आदेश दिया कि वह 5.7 करोड़ रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाएं। यह ब्याज उस तारीख से लागू होगा जब धवन ने मामला दर्ज कराया था। Bar and Bench
  • ऑस्ट्रेलियाई अदालत के आदेश खारिज: दिल्ली की अदालत ने फरवरी 2024 में एक ऑस्ट्रेलियाई अदालत द्वारा दिए गए उन आदेशों को भी रोक दिया, जिसमें धवन की वैश्विक संपत्तियों का बंटवारा किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलियाई अदालत को इस वैवाहिक विवाद को संभालने का कोई अधिकार नहीं था।
  • धोखाधड़ी के आरोप: धवन ने अदालत को बताया कि 2012 में शादी के बाद आयशा ने उनके क्रिकेट करियर और प्रतिष्ठा को बर्बाद करने की धमकी देकर उन्हें अपनी संपत्ति उनके नाम करने के लिए मजबूर किया था। एक मामले में, धवन द्वारा खरीदी गई संपत्ति में आयशा को 99 प्रतिशत का मालिक बना दिया गया था। India Today

तलाक और बेटे की कस्टडी:

  • मानसिक प्रताड़ना: दिल्ली की अदालत ने 2023 में ही दोनों को तलाक की मंजूरी दे दी थी। तब कोर्ट ने माना था कि आयशा ने धवन को उनके बेटे जोरावर से सालों तक दूर रखकर उन्हें “मानसिक प्रताड़ना” दी थी।
  • मुलाकात का अधिकार: धवन को बेटे की स्थायी कस्टडी तो नहीं मिली, लेकिन उन्हें भारत और ऑस्ट्रेलिया में मिलने और वीडियो कॉल करने का अधिकार दिया गया था। हालांकि, धवन ने बाद में आरोप लगाया था कि उन्हें उनके बेटे से बात करने से पूरी तरह रोक दिया गया है। Hindustan Times

यह फैसला शिखर धवन के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है, जो लंबे समय से इस विवाद के कारण मानसिक और आर्थिक दबाव झेल रहे थे।

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