भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता ‘सुनी’ विलियम्स ने हाल ही में भारत यात्रा के दौरान कहा कि उन्हें अपने पैतृक गांव गुजरात के झुलासन ज़रूर जाना होगा। 📌 क्यों कहा उन्होंने ऐसा? झुलासन के लोग उनकी उपलब्धियों को अपनी उपलब्धियों की तरह मनाते हैं। सुनीता पहले भी अपने पिता और परिवार के साथ गांव जा चुकी हैं और वहां के लोगों से गहरा जुड़ाव महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि अगली बार अपनी बहन और परिवार के साथ वहां लौटने की उम्मीद करती हैं। 🚀 अंतरिक्ष से मिली सीख अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने पर उन्हें लगा कि सीमाओं और संघर्ष का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने कहा: “जब आप ऊपर से पृथ्वी को देखते हैं, तो बहस और लड़ाई करना बहुत अजीब लगता है। हम सब एक ही पानी, हवा और ज़मीन साझा करते हैं।” यह अनुभव उन्हें सहानुभूति और धैर्य के महत्व के और करीब ले गया। 👩🚀 करियर की झलक नासा में 27 साल काम किया और दिसंबर 2025 में रिटायर हुईं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर तीन लंबे मिशन पूरे किए, कुल 600 दिन से अधिक समय अंतरिक्ष में बिताया। एक महिला के रूप में सबसे ज़्यादा स्पेसवॉक का रिकॉर्ड बनाया। 2024 में बोइंग स्टारलाइनर की तकनीकी समस्या के कारण उन्हें 9 महीने तक ISS में रहना पड़ा। ✨ भारत से जुड़ाव और भविष्य की योजनाएँ केरल साहित्य महोत्सव में भाग लेने आईं और भारत की तकनीकी प्रगति से प्रभावित हुईं। कहा कि भारत में मानव शक्ति और प्रतिभा की कोई सीमा नहीं है। रिटायरमेंट के बाद वह परिवार के साथ यात्रा करना चाहती हैं—केरल के समुद्र तटों से लेकर लद्दाख के पहाड़ों तक। उन्होंने कहा कि उन्हें पहाड़ बहुत पसंद हैं और रिटायरमेंट के बाद सबसे ज़्यादा उत्साहित करती है: “पहाड़ों पर चढ़ना।” सुनीता विलियम्स की कहानी यह दिखाती है कि अंतरिक्ष से मिली दृष्टि इंसानों को ज़मीन पर भी जोड़ सकती है। उनका पैतृक गांव झुलासन उनके लिए सिर्फ़ एक जगह नहीं, बल्कि पहचान और जुड़ाव का प्रतीक है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation सऊदी और यूएई का हवाई क्षेत्र बंद करने का फ़ैसला: क्या अमेरिका को ईरान पर हमले से रोका जा सकता है? हिमंत बिस्वा सरमा वीडियो विवाद: राजनीतिक मायने