नई दिल्ली | 17 फरवरी, 2026 | लाइफस्टाइल और करियर डेस्क

“नमस्कार, आप देख रहे हैं ‘करियर मंथन’। पिछले कई दशकों से सफलता का मतलब था—बिना रुके ऊपर बढ़ते जाना। लेकिन 2026 में यह सोच बदल रही है। भारत के मिड-करियर प्रोफेशनल्स, जो पिछले 12-15 सालों से लगातार काम कर रहे हैं, अब एक साल का ब्रेक ले रहे हैं। इसे न तो करियर खत्म करना कहा जा रहा है और न ही आलस; इसे नाम दिया गया है ‘माइक्रो-रिटायरमेंट’। आखिर क्यों पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स अपनी लाखों की सैलरी छोड़कर ब्रेक ले रहे हैं? आइए समझते हैं।”

न्यूज़ हेडलाइन्स (Main Highlights)

  • बदलता नजरिया: लिंक्डइन (LinkedIn) के आंकड़ों के अनुसार, करीब 62% प्रोफेशनल्स अपने करियर में कभी न कभी ब्रेक ले चुके हैं।
  • कलंक नहीं, समझदारी: एचआर एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब करियर गैप को ‘रेड फ्लैग’ नहीं, बल्कि ‘आत्म-जागरूकता’ और ‘मैच्योरिटी’ का संकेत माना जा रहा है।
  • माइक्रो-रिटायरमेंट का ट्रेंड: 60 साल की उम्र में रिटायर होने के बजाय, लोग अपने करियर के बीच-बीच में छोटे-छोटे रिटायरमेंट या ब्रेक लेना पसंद कर रहे हैं।
  • स्किलिंग और एआई: एआई (AI) के आने से मची हलचल के बीच, कई लोग नई तकनीक सीखने (Upskilling) के लिए यह ब्रेक ले रहे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट: क्यों जरूरी हुआ यह ‘पॉज बटन’?

[रिपोर्टर वॉयसओवर]
मिड-करियर ब्रेक लेने वाले इन लोगों के पास होम लोन, बच्चों की फीस और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारियां हैं, फिर भी वे यह जोखिम उठा रहे हैं। इसके पीछे 4 मुख्य कारण हैं:

  1. बर्नआउट (Burnout) से रिकवरी: लगातार काम के दबाव और तनाव के कारण मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए लोग ब्रेक ले रहे हैं।
  2. सैंडविच जनरेशन की चुनौतियां: 30-40 साल के लोग बच्चों और बूढ़े माता-पिता दोनों की देखभाल की जिम्मेदारी के बीच फंसे हैं, जिसके लिए ऑफिस की छुट्टियां कम पड़ रही हैं।
  3. करियर में बदलाव (Pivot): एआई के दौर में अपनी पुरानी स्किल को अपडेट करने या किसी नए क्षेत्र में स्विच करने के लिए यह समय इस्तेमाल किया जा रहा है।
  4. स्टार्टअप और सपने: कई लोग इस समय का उपयोग अपने किसी पुराने आइडिया या शौक को बिजनेस में बदलने के लिए कर रहे हैं।

क्या हर कोई यह ब्रेक ले सकता है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह ब्रेक फिलहाल शहरी उच्च-मध्यम वर्ग (Upper Middle Class) तक सीमित है। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि ऐसा ब्रेक लेने से पहले आपके पास कम से कम 9 से 12 महीने का खर्च और इमरजेंसी फंड तैयार होना चाहिए।


नियोक्ताओं (Employers) का बदलता रुख

पहले कंपनियां लंबे गैप वाले उम्मीदवारों को नौकरी देने में हिचकिचाती थीं। लेकिन अब कंपनियां ‘रिटर्नशिप’ (Returnship) प्रोग्राम चला रही हैं, ताकि ब्रेक से लौटने वाले अनुभवी लोगों को फिर से मुख्यधारा में लाया जा सके।

[एंकर साइन-ऑफ]
“करियर अब एक सीधी दौड़ नहीं, बल्कि एक मैराथन है, जहाँ बीच-बीच में रुककर सांस लेना और पानी पीना आपको लंबी रेस का घोड़ा बनाता है। न्यूज़ डेस्क से मैं [AI सहायक], कैमरामैन के साथ।”


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