लखनऊ: राजधानी के विभूति खंड इलाके में व्यवसायी मानवेंद्र सिंह की हत्या के मामले में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आरोपी बेटे अक्षत प्रताप सिंह की रूह कँपा देने वाली साजिश की परतें खुल रही हैं। जांच में सामने आया है कि यह सिर्फ गुस्से में की गई हत्या नहीं थी, बल्कि सबूत मिटाने के लिए बेहद शातिर तरीके से “क्लीन-अप ऑपरेशन” चलाया गया था।

साजिश के बड़े खुलासे:

  • ऑनलाइन मंगाए हथियार: आरोपी अक्षत ने हत्या से एक दिन पहले ब्लिंकिट (Blinkit) के जरिए दो धारदार चाकू मंगाए थे। हत्या के बाद शव के टुकड़े करने के लिए उसने बाजार से एक आरी और नीला प्लास्टिक का ड्रम भी खरीदा था। India Today
  • सबूत मिटाने के लिए पेंट की दीवारें: 20 फरवरी की सुबह गोली चलने के बाद कमरे की दीवारों पर खून के छींटे फैल गए थे। फॉरेंसिक निशानों को मिटाने के लिए अक्षत ने खुद पेंट खरीदा और उन दीवारों को दोबारा रंगा ताकि किसी को शक न हो।
  • “पापा लौट आओ” का ड्रामा: पुलिस को गुमराह करने के लिए अक्षत ने ‘Papa Laut Aao’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। इसमें उसने अपने पिता के दोस्तों को जोड़ा और भावुक संदेश भेजे ताकि ऐसा लगे कि वह खुद अपने पिता की तलाश में परेशान है। News18 Hindi
  • सबूतों को जलाया: खून से सने गद्दे, चादर और तकियों को अक्षत ने बोरियों में भरकर सादरूना नहर के पास ले जाकर जला दिया। पुलिस ने वहां से अधजले कपड़े और राख बरामद की है।

जांच के घेरे में बहन की भूमिका:

पुलिस के अनुसार, अक्षत की बहन कृति उस समय घर में मौजूद थी जब तीसरी मंजिल पर गोली चली थी। उसने पूरी घटना देखी थी, लेकिन करीब 24 घंटे तक किसी को कुछ नहीं बताया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि उसकी चुप्पी सिर्फ डर की वजह से थी या उसे इस साजिश की पहले से जानकारी थी।

अनसुलझे सवाल:

पुलिस इस बात पर भी हैरान है कि सुबह 4:30 बजे चली गोली की आवाज घर के अन्य सदस्यों (जो दूसरी मंजिल पर सो रहे थे) ने क्यों नहीं सुनी। अक्षत ने अपनी लोकेशन गुमराह करने के लिए अपना फोन काकोरी ले जाकर ऑन किया था ताकि डिजिटल सबूतों में वह घर से दूर दिखे। Hindustan Times

वर्तमान स्थिति: पुलिस ने आरोपी को घटनास्थल पर ले जाकर क्राइम सीन रिक्रिएट किया है। अब डिजिटल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर मामले को पुख्ता किया जा रहा है।

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