लंदन: वह कंपनी जिसने कभी भारत पर राज किया और ब्रिटिश साम्राज्यवाद की नींव रखी, एक बार फिर इतिहास के पन्नों में दफन हो गई है। लंदन स्थित ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’, जिसे एक भारतीय व्यवसायी ने ‘लक्जरी ब्रांड’ के रूप में पुनर्जीवित किया था, अब दिवालिया होकर बंद हो गई है। ‘गुलाम’ ने जब ‘मालिक’ को खरीदा थासाल 2010 में जब भारतीय मूल के उद्यमी संजीव मेहता ने ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के नाम के अधिकार खरीदे थे, तो इसे पूरी दुनिया में “उपनिवेशवाद का बदला” (Revenge of the Colonised) कहा गया था। जिस कंपनी ने भारत को लूटा, उसका मालिक एक भारतीय बन गया था। मेहता ने लंदन के पॉश इलाके मेफेयर में एक आलीशान स्टोर खोला, जहाँ महंगी चाय, चॉकलेट और मसाले बेचे जाते थे। क्यों बंद हुई कंपनी? (दिवालिया होने के कारण):ब्रिटिश अखबार द संडे टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक ईस्ट इंडिया कंपनी भारी कर्ज में डूब गई है: कुल कर्ज: कंपनी पर करीब 9.5 लाख पाउंड (लगभग 10 करोड़ रुपये) का बकाया है। टैक्स और वेतन: कंपनी पर 2 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है और करीब 1.7 करोड़ रुपये कर्मचारियों के वेतन के रूप में देने बाकी हैं। लिक्विडेशन: अक्टूबर 2025 में कंपनी ने आधिकारिक तौर पर ‘लिक्विडेटर्स’ (समापक) नियुक्त कर दिए हैं। लंदन के न्यू बॉन्ड स्ट्रीट स्थित इसका मशहूर स्टोर अब खाली है और किराए के लिए उपलब्ध है। ईस्ट इंडिया कंपनी का काला इतिहास:मूल ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को महारानी एलिजाबेथ प्रथम के चार्टर के जरिए हुई थी। निजी सेना: 1800 के दशक की शुरुआत में इस कंपनी के पास 2.5 लाख सैनिकों की अपनी निजी सेना थी, जो उस समय की ब्रिटिश सेना से दोगुनी बड़ी थी। शोषण और अकाल: कंपनी के शासन के दौरान भारत का बड़े पैमाने पर आर्थिक शोषण हुआ। ‘बंगाल के महान अकाल’ (Great Bengal Famine) के दौरान करीब 3 करोड़ लोगों की जान गई थी। 1857 का विद्रोह: 1857 की क्रांति के बाद, 1858 में ब्रिटिश क्राउन ने कंपनी से नियंत्रण छीनकर सीधे अपने हाथ में ले लिया (ब्रिटिश राज)। अंततः 1874 में मूल कंपनी को पूरी तरह भंग कर दिया गया था। अंत:संजीव मेहता ने 2017 में एक साक्षात्कार में कहा था कि “पुरानी कंपनी आक्रामकता पर बनी थी, लेकिन आज की कंपनी करुणा (Compassion) पर आधारित है।” हालांकि, व्यापारिक मोर्चे पर यह ‘करुणा’ काम नहीं आई और वित्तीय कुप्रबंधन व कर्ज के कारण इस ऐतिहासिक नाम का दूसरा अध्याय भी दुखद अंत के साथ समाप्त हो गया। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation जामनगर में अंबानी परिवार ने की अर्जुन तेंदुलकर और सानिया चंढोक की मेजबानी; सचिन हुए भावुक, नीता अंबानी ने दिया आशीर्वाद कोडावा शादी: कूर्ग की योद्धा परंपरा (Warrior Heritage)