नई दिल्ली: चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि यह कदम शहर की प्राचीन सभ्यता और पहचान को पुनर्जीवित करेगा।

प्रस्ताव के मुख्य तर्क:

  • ऐतिहासिक जड़ें: खंडेलवाल के अनुसार, ‘इंद्रप्रस्थ’ नाम महाभारत काल से जुड़ा है और यह राजधानी की सबसे प्राचीन नागरिक सभ्यता का प्रतीक है, जबकि ‘दिल्ली’ नाम बाद के ऐतिहासिक काल को दर्शाता है। India Today
  • सांस्कृतिक गौरव: उन्होंने कहा कि यह बदलाव आधुनिक भारत को उसके गौरवशाली अतीत से जोड़ेगा और दुनिया के सामने भारत की प्राचीन विरासत को मजबूती से रखेगा।
  • मौजूदा स्वीकार्यता: सांसद ने उल्लेख किया कि दिल्ली के कई संस्थान और नागरिक सुविधाएं पहले से ही ‘इंद्रप्रस्थ’ नाम का उपयोग करती हैं, जिससे जनता के बीच इस नाम की स्वीकार्यता स्पष्ट है।
  • पुराने उदाहरण: उन्होंने मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और प्रयागराज के नाम परिवर्तन का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वदेशी और ऐतिहासिक पहचान को बहाल करना राष्ट्रीय गर्व का विषय है। News18 Hindi

राजनीतिक संदर्भ:

यह मांग तब आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 24 फरवरी 2026 को केरल का नाम ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री ने इसे “गौरवशाली संस्कृति से जुड़ने का प्रयास” बताया है। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने राज्य का नाम ‘बांग्ला’ करने के लंबित प्रस्ताव को लेकर केंद्र पर सवाल उठाए हैं। Hindustan Times

अगला कदम: सांसद ने गृह मंत्रालय से इतिहासकारों और पुरातत्वविदों से परामर्श कर इस पर निर्णय लेने का अनुरोध किया है।

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