नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट ने केरल का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जहाँ एक ओर केरल की दशकों पुरानी मांग पूरी होने के करीब है, वहीं पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पिछले कई वर्षों से दिए गए नाम बदलने के प्रस्ताव केंद्र के पास लंबित हैं।

केरल के ‘केरलम’ बनने की राह आसान क्यों हुई?

  • भाषाई और सांस्कृतिक आधार: केरल सरकार का तर्क है कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम हमेशा से ‘केरलम’ रहा है, जबकि ‘केरल’ नाम औपनिवेशिक शासन की देन है। The Indian Express के अनुसार, अगस्त 2023 और जून 2024 में केरल विधानसभा ने इसके लिए सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किए थे।
  • एकजुटता: केरल में सत्ताधारी CPM और विपक्षी कांग्रेस दोनों इस बदलाव पर सहमत थे। साथ ही, राज्य की बीजेपी इकाई ने भी इसका समर्थन किया, जिससे केंद्र के लिए निर्णय लेना आसान हो गया।

पश्चिम बंगाल का प्रस्ताव क्यों अटका?

ममता बनर्जी सरकार ने 2011 से अब तक कई बार नाम बदलने के प्रस्ताव भेजे, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. नामों में भ्रम: 2016 में बंगाल सरकार ने तीन भाषाओं में तीन अलग नाम (अंग्रेजी में Bengal, बांग्ला में Bangla और हिंदी में Bangal) प्रस्तावित किए थे। केंद्र ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि एक राज्य के लिए एक ही आधिकारिक नाम होना चाहिए।
  2. पड़ोसी देश से समानता: विदेश मंत्रालय (MEA) ने ‘Bangla’ नाम पर आपत्ति जताई थी। मंत्रालय का तर्क था कि यह नाम पड़ोसी देश बांग्लादेश से मिलता-जुलता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। The Hindu
  3. राजनीतिक मतभेद: ममता बनर्जी का आरोप है कि केरल के प्रस्ताव को इसलिए मंजूरी मिली क्योंकि वहां BJP और CPM के बीच “अंडरस्टैंडिंग” है, जबकि बंगाल के मामले में केंद्र का रवैया भेदभावपूर्ण है।

नाम बदलने की प्रक्रिया (अनुच्छेद 3):

संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य का नाम बदलने की अंतिम शक्ति संसद के पास है।

  • अब राष्ट्रपति एक विधेयक केरल विधानसभा को भेजेंगे।
  • विधानसभा की राय मिलने के बाद, संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत से विधेयक पारित होना अनिवार्य है।

ममता बनर्जी का तर्क: बंगाल सरकार नाम इसलिए बदलना चाहती है ताकि वर्णानुक्रम (Alphabetical order) में राज्य का नाम ऊपर आ सके और आधिकारिक बैठकों में बंगाल के प्रतिनिधियों को बोलने का मौका जल्दी मिले।

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