मुंबई/बेंगलुरु: भारतीय कॉर्पोरेट जगत इस समय एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ ‘बेबी बूमर्स’ (पुरानी पीढ़ी) रिटायर हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ अगली पीढ़ी नेतृत्व की पारंपरिक परिभाषा को चुनौती दे रही है। ‘मिलेनियल्स’ (30-45 वर्ष) जहाँ नौकरियों की असुरक्षा और ‘बर्नआउट’ से जूझ रहे हैं, वहीं ‘जेन-जी’ (21-28 वर्ष) के लिए ऊंचे पदों का आकर्षण कम होता जा रहा है। प्रमुख आंकड़े और चुनौतियां: आकांक्षा का संकट (Aspiration Crisis): डेलॉयट के 2025 के ग्लोबल सर्वे के अनुसार, केवल 6% जेन-जी पेशेवर ही सीनियर लीडरशिप पदों तक पहुँचने को अपना प्राथमिक लक्ष्य मानते हैं। उनके लिए पद और प्रतिष्ठा से अधिक ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ और व्यक्तिगत समय महत्वपूर्ण है। Deloitte Survey 2025 मिलेनियल्स का डर: लगभग 50% मिलेनियल्स को डर है कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) अगले 3-5 वर्षों में उनकी जगह ले लेगा। नौकरियों के जाने के डर और होम लोन जैसी वित्तीय जिम्मेदारियों ने इस पीढ़ी को भारी तनाव और ‘बर्नआउट’ की स्थिति में धकेल दिया है। World Economic Forum जेन-जी की नई सोच: यह पीढ़ी पद (Designation) के बजाय कौशल (Skills) और लचीलेपन (Flexibility) को प्राथमिकता दे रही है। उनके लिए ऐसी कंपनियों में काम करना अधिक महत्वपूर्ण है जिनका कोई सामाजिक उद्देश्य (Purpose) हो। लीडरशिप मॉडल में बदलाव की जरूरत: विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या प्रतिभा (Talent) की कमी नहीं, बल्कि उस ‘लीडरशिप मॉडल’ की है जो युवाओं को आकर्षित नहीं कर पा रहा है। नितिन कामथ (जेरोधा) जैसे उद्यमियों का कहना है कि हमें ऐसे बिजनेस बनाने होंगे जहाँ लोग खुद को साबित करने के चक्कर में ‘बर्नआउट’ न हों। हर्ष मारीवाला (मैरिको) के अनुसार, लंबी अवधि की सफलता के लिए ‘लीडरशिप निरंतरता’ (Continuity) जरूरी है, लेकिन इसके लिए एक पाइपलाइन तैयार करनी होगी। Economic Times भविष्य का नेतृत्व कैसा होगा? 2030 और उसके बाद का CEO केवल सबसे ऊंची आवाज वाला व्यक्ति नहीं होगा, बल्कि वह होगा जो: AI और इंसानी ऊर्जा के बीच संतुलन बना सके। पदानुक्रम (Hierarchy) के बजाय सहयोग (Collaboration) पर ध्यान दे। काम के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे। निष्कर्ष: कॉर्पोरेट इंडिया को अब खुद से यह सवाल पूछना होगा: “क्या हम नेतृत्व का ऐसा स्वरूप तैयार कर रहे हैं जिसे अगली पीढ़ी वास्तव में अपनाना चाहती है?” FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation झारखंड एयर एम्बुलेंस हादसा: विमान में नहीं था ‘ब्लैक बॉक्स’, जांच में आएंगी बड़ी मुश्किलें आकाश में सजेगी छह ग्रहों की ‘परेड’: जानें भारत में कब और कैसे देख सकेंगे यह दुर्लभ नजारा