पणजी: बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने मंगलवार (24 फरवरी 2026) को नाइटक्लब मालिकों और प्रशासन के रवैये पर गहरी निराशा व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि कुछ लोग “चंद पैसे कमाने” की होड़ में सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिक कर्तव्यों से समझौता कर रहे हैं। अदालत की मुख्य टिप्पणियां: सार्वजनिक कर्तव्य: बेंच ने कहा, “सुरक्षा सुनिश्चित करना एक सार्वजनिक कर्तव्य है। अगर लोग कुछ पैसों के लिए अपने नागरिक कर्तव्यों को भूल जाते हैं, तो हमें मामले दर मामले इससे निपटना होगा।” Business Today प्रशासनिक विफलता: कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक चूक बनी रहती है, तो न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना होगा, हालांकि उन्होंने कहा कि वे अनावश्यक अराजकता से बचने के लिए संतुलित कदम उठाएंगे। सर्वे की मांग: कोर्ट में राज्य भर के अवैध निर्माणों और सुरक्षा उल्लंघनों की पहचान के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण की मांग भी उठाई गई। Hindustan Times हादसे और मुआवजे का विवरण: हादसा: 7 दिसंबर (पिछले साल) की आधी रात को अर्पोरा के नाइटक्लब में एक ‘इंडोर फायर शो’ के दौरान आग लगी थी। करीब 100 लोग डांस फ्लोर पर थे। जांच में पाया गया कि लुथरा भाइयों ने बिना सुरक्षा उपायों के आतिशबाजी की अनुमति दी थी। मृतक: इस त्रासदी में 25 लोगों (पर्यटकों और स्टाफ) की मौत हुई थी। मुआवजा: महाधिवक्ता (Advocate General) ने कोर्ट को बताया कि प्रत्येक मृतक के परिवार को 7 लाख रुपये (5 लाख राज्य सरकार और 2 लाख केंद्र सरकार द्वारा) दिए गए हैं। घायलों को 1 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। NDTV India आगे की राह: अदालत ने स्पष्ट किया कि वह जवाबदेही तय करने और सुरक्षा मानदंडों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए इस मामले की निरंतर निगरानी करेगी। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation क्रिकेट मैच का विवाद बना काल: दिल्ली में 12 साल के बच्चे की 3 किशोरों ने पीट-पीटकर हत्या की संजय लीला भंसाली की टीम ने स्वास्थ्य की अफवाहों को नकारा; ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज में देरी