न्यूयॉक/वॉशिंगटन: अमेरिका का पूर्वोत्तर हिस्सा इस समय सदी के सबसे भयानक बर्फीले तूफान ‘विंटर स्टॉर्म हर्नांडो’ (Winter Storm Hernando) की चपेट में है। न्यूयॉर्क सहित पांच राज्यों में 30 इंच (करीब 3 फीट) तक बर्फ गिर चुकी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है। 10,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हैं और लाखों लोग बिना बिजली के अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। #### क्या होता है ‘बॉम्ब साइक्लोन’ (Bomb Cyclone)?मौसम विज्ञानियों ने इसे ‘बॉम्ब साइक्लोन’ घोषित किया है। सरल भाषा में कहें तो यह “स्टेरॉयड पर सवार तूफान” जैसा है। बॉम्बोजेनेसिस (Bombogenesis): जब किसी तूफान के केंद्र का वायुदाब (Central Pressure) 24 घंटे के भीतर 24 मिलीबार (mb) से ज्यादा गिर जाता है, तो उसे ‘बॉम्ब साइक्लोन’ कहते हैं। असर: दबाव जितनी तेजी से गिरता है, तूफान उतना ही हिंसक हो जाता है। ‘हर्नांडो’ का दबाव 988 mb तक गिर गया, जिससे समुद्र में उठने वाले चक्रवात जैसी हवाएं और भारी बर्फबारी शुरू हो गई। इस महा-तूफान के पीछे की वजह क्या है? इस तबाही के पीछे तीन मुख्य भौगोलिक और जलवायु कारण हैं: ठंडी और गर्म हवा का टकराव: कनाडा से आने वाली आर्कटिक की बर्फीली हवा जब अटलांटिक महासागर की गर्म और नम हवा से मिली, तो वातावरण में भारी अस्थिरता पैदा हो गई। ध्रुवीय भंवर (Polar Vortex): आमतौर पर ध्रुवीय हवाएं उत्तर ध्रुव के पास कैद रहती हैं। लेकिन जब यह भंवर (Vortex) कमजोर पड़ता है, तो ठंडी हवा दक्षिण की ओर आबादी वाले इलाकों (जैसे न्यूयॉर्क) में घुस आती है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change): वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्कटिक के गर्म होने से ‘पोलर वर्टेक्स’ अस्थिर हो गया है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे “फ्रीजर का दरवाजा खुला छोड़ देना”, जिससे ध्रुवों की ठंड पूरी दुनिया में फैलने लगती है। तबाही के आंकड़े और स्थिति रिकॉर्ड बर्फबारी: रोड आइलैंड के प्रोविडेंस शहर में इतिहास की सबसे ज्यादा बर्फबारी दर्ज की गई। कई इलाकों में प्रति घंटे 3 इंच बर्फ गिर रही है। थंडरस्नो (Thundersnow): इस तूफान के दौरान बिजली कड़कने के साथ बर्फबारी देखी गई, जो एक दुर्लभ और खतरनाक स्थिति है। ठप हुआ शहर: न्यूयॉर्क का प्रसिद्ध ‘ब्रॉडवे’ बंद कर दिया गया है, स्कूल बंद हैं और सड़कों पर यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। करीब 4 करोड़ लोग इस समय ‘ब्लिज़ार्ड वॉर्निंग’ (बर्फीले तूफान की चेतावनी) के दायरे में हैं। निष्कर्ष 2026 का यह तूफान इस बात का प्रमाण है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम की घटनाएं अब पहले से कहीं ज्यादा चरम और विनाशकारी होती जा रही हैं। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation भारत-अमेरिका व्यापार समझौता टला: नई दिल्ली ने क्यों लगाए वार्ता पर ‘ब्रेक’? CJI का सख्त रुख: NCERT की किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ के जिक्र पर सुप्रीम कोर्ट नाराज