पटना: बिहार की सड़कों पर शादियों और उत्सवों के दौरान बजने वाले कानफोड़ू डीजे (DJ) पर अब लगाम कसने की तैयारी हो गई है। बिहार के परिवहन सचिव राज कुमार (IAS 2010 बैच) ने एक कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाते हुए राज्यभर में अवैध रूप से मॉडिफाई की गई डीजे गाड़ियों के खिलाफ बड़े अभियान की घोषणा की है।

15 दिनों का अल्टीमेटम और सख्त सजा:
परिवहन सचिव ने सभी जिला परिवहन अधिकारियों (DTO) और मोटर वाहन निरीक्षकों (MVI) को निर्देश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर सघन चेकिंग अभियान चलाएं। आदेश के मुताबिक:

  • भारी जुर्माना: नियम तोड़ने वाले वाहनों पर मोटा जुर्माना लगाया जाएगा।
  • रजिस्ट्रेशन रद्द: अवैध रूप से स्पीकर और लाइट लगाने वाली गाड़ियों का पंजीकरण (Registration) तुरंत रद्द किया जा सकता है।
  • गिरफ्तारी: गंभीर मामलों में वाहन मालिकों या संचालकों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।

कार्रवाई का कानूनी आधार:
राज कुमार ने स्पष्ट किया है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत किसी भी व्यावसायिक वाहन की मूल संरचना (Structure) में बिना अनुमति बदलाव करना अवैध है। डीजे संचालक गाड़ियों पर बड़े-बड़े लोहे के रैक, भारी एम्पलीफायर और जनरेटर लगाकर सड़क सुरक्षा और वाहन की बनावट के साथ खिलवाड़ करते हैं, जो कानूनन जुर्म है।

स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा:
प्रशासन का यह कदम केवल शोर रोकने के लिए नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए भी है:

  1. बहरापन: सामान्य बातचीत 50-60 डेसिबल पर होती है, लेकिन ये डीजे 100 डेसिबल से अधिक शोर करते हैं, जिससे सुनने की शक्ति हमेशा के लिए जा सकती है।
  2. मानसिक तनाव: तेज आवाज से नींद में खलल, हाई ब्लड प्रेशर और बच्चों की एकाग्रता पर बुरा असर पड़ता है।
  3. सड़क हादसे: सड़क पर बजने वाले तेज संगीत और चकाचौंध करने वाली लाइटों से अन्य चालकों का ध्यान भटकता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

सख्त अधिकारी की छवि:
IAS राज कुमार अपनी कार्यकुशलता के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले समाज कल्याण विभाग में रहते हुए उन्होंने दर्जनों खोए हुए बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब उनका लक्ष्य बिहार की रातों को शांत और नागरिकों को सुरक्षित बनाना है।

निष्कर्ष:
परिवहन विभाग के इस अभियान से डीजे संचालकों में हड़कंप मच गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव को स्थायी बनाने के लिए केवल एक बार की छापेमारी काफी नहीं होगी, बल्कि निरंतर निगरानी और जनता में जागरूकता की जरूरत है।


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