नई दिल्ली: कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ के उल्लेख पर सुप्रीम कोर्ट का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को “संस्थागत गरिमा को कम करने की एक गहरी साजिश” मानते हुए 5 बेहद सख्त आदेश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह मामला केवल किताब वापस लेने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें जवाबदेही भी तय की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के 5 बड़े निर्देश: सभी प्लेटफॉर्म से तत्काल हटाना:सुप्रीम कोर्ट ने NCERT को आदेश दिया है कि वह केंद्र और राज्य के शिक्षा विभागों के साथ तालमेल बिठाकर कक्षा 8 की इस किताब की हर कॉपी (हार्ड कॉपी और डिजिटल दोनों) को सार्वजनिक पहुंच से तुरंत हटाए। यह आदेश रिटेल दुकानों, स्कूलों और ऑनलाइन पोर्टल पर समान रूप से लागू होगा। किताबों की जब्ती और अनुपालन रिपोर्ट:CJI ने NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी को स्कूलों में भेजी गई सभी प्रतियों को तुरंत जब्त करने की जिम्मेदारी सौंपी है। सभी राज्यों के शिक्षा सचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे इस आदेश को लागू करें और दो सप्ताह के भीतर कोर्ट में अपनी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) जमा करें। पढ़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध:कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि इस विवादित किताब के आधार पर स्कूलों में कोई भी शिक्षण कार्य नहीं किया जाएगा। यदि कहीं किताब की कॉपी उपलब्ध भी है, तो भी शिक्षक उस सामग्री का उपयोग क्लास में नहीं कर पाएंगे। उत्पादन और वितरण पर पूर्ण रोक:सावधानी के तौर पर कोर्ट ने इस किताब के नए प्रकाशन और वितरण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि डिजिटल या फिजिकल रूप से इस किताब को बांटने की किसी भी कोशिश को ‘अदालत की अवमानना’ (Contempt of Court) का उल्लंघन माना जाएगा। लेखकों के नाम और बैठक के ब्यौरे (Minutes) की मांग:अदालत ने NCERT निदेशक से उन सभी सदस्यों के नाम और योग्यता का विवरण मांगा है जिन्होंने इस चैप्टर को तैयार किया था। साथ ही, उन बैठकों के मूल मिनट्स (Minutes of Meeting) भी मांगे गए हैं जिनमें इस चैप्टर को अंतिम रूप दिया गया था। इसके अलावा, शिक्षा सचिव और NCERT निदेशक को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। निष्कर्ष:सुप्रीम कोर्ट के इन कड़े निर्देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि वह स्कूली शिक्षा के माध्यम से न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा। जस्टिस सूर्यकांत ने कड़े शब्दों में कहा है कि “इसमें शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय होगी और दोषियों पर गाज गिरेगी।” FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation स्कूल में 9 साल की बच्ची को हार्ट अटैक, चार माह पहले भाई की भी हुई थी मौत जयमाला के दौरान दुल्हन पर हमला, यूपी से आई बारात में मची अफरा-तफरी