मुंबई: रिजर्व बैंक ने ‘रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट अमेंडमेंट डायरेक्शंस, 2026’ का मसौदा (Draft) जारी किया है। इसके तहत बैंकों को जुलाई 2026 तक अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म से सभी तरह के भ्रमित करने वाले डिजाइन हटाने होंगे। क्या हैं डार्क पैटर्न्स (Dark Patterns)? ये ऐसे डिजाइन ट्रिक्स हैं जिनका उपयोग ग्राहकों के व्यवहार को प्रभावित करने के लिए किया जाता है, जैसे: छिपे हुए शुल्क: चेकआउट के समय अचानक कोई नया चार्ज जुड़ जाना। जबरन बंडलिंग: एक सेवा के साथ दूसरी अनचाही वित्तीय सेवा (जैसे इंश्योरेंस) को जबरन जोड़ देना। कन्फ्यूजिंग बटन: सब्सक्रिप्शन रद्द करने या अकाउंट बंद करने की प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बनाना। बार-बार प्रॉम्प्ट: किसी एड-ऑन सर्विस को खरीदने के लिए बार-बार नोटिफिकेशन भेजना। Reserve Bank of India (RBI) नए नियमों की मुख्य बातें: स्पष्ट सहमति (Clear Consent): बैंकों को किसी भी उत्पाद या सेवा को ऑफर करने से पहले ग्राहक की स्पष्ट अनुमति लेनी होगी। बंडलिंग पर रोक: बैंक अब ग्राहकों पर उनकी मर्जी के बिना अन्य वित्तीय उत्पादों को थोप नहीं सकेंगे। Business Today पारदर्शिता: ग्राहकों को शुरुआत में ही पता होना चाहिए कि वे किस सेवा के लिए कितना भुगतान कर रहे हैं। डेडलाइन: सभी बैंकों को इन नियमों का पालन करने और डार्क पैटर्न्स हटाने के लिए जुलाई 2026 तक का समय दिया गया है। The Economic Times क्यों पड़ी इसकी जरूरत? LocalCircles द्वारा 388 जिलों में किए गए एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण (1.61 लाख प्रतिक्रियाएं) में सामने आया कि डिजिटल बैंकिंग में डार्क पैटर्न्स का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। कई उपयोगकर्ताओं ने शिकायत की कि सब्सक्रिप्शन रद्द करना साइन-अप करने की तुलना में कहीं अधिक कठिन है और कई शुल्क शुरू में स्पष्ट नहीं किए जाते हैं। निष्कर्ष: RBI की इस पहल का उद्देश्य डिजिटल वित्तीय सेवाओं को सरल, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाना है, ताकि तकनीक का उपयोग ग्राहकों को लूटने के बजाय उनकी सुविधा के लिए हो सके। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation मारुति सुजुकी का वैश्विक कीर्तिमान: गुजरात रेलवे साइडिंग बना दुनिया का पहला ‘Verra-पंजीकृत’ मोडल शिफ्ट प्रोजेक्ट सोना ₹1.61 लाख के पार, चांदी ₹2.7 लाख के करीब; जानें क्या अब भी निवेश का है सही मौका?