रांची/चतरा: झारखंड के चतरा जिले में हुए दर्दनाक एयर एम्बुलेंस हादसे की जांच में एक बड़ा पेच फंस गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान में ‘ब्लैक बॉक्स’ (कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर – CVR या फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर – FDR) मौजूद नहीं था। इस हादसे में विमान में सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई थी। विमान में ब्लैक बॉक्स क्यों नहीं था? पुराने नियम: दुर्घटनाग्रस्त विमान Beechcraft C90 (VT-AJV) का निर्माण 1987 में हुआ था। DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के नियमों के अनुसार, 5,700 किलोग्राम से कम वजन वाले और पुराने मॉडलों के लिए ब्लैक बॉक्स अनिवार्य नहीं था। वजन का मानक: इस विमान का अधिकतम वजन 4,583 किलोग्राम था, जो अनिवार्य श्रेणी (5,700 किग्रा से अधिक) से कम है। 1990 से पहले बने ऐसे विमानों को इन उपकरणों से छूट प्राप्त थी। Business Today हादसे का घटनाक्रम (23 फरवरी 2026): रवानगी: विमान ने शाम 7:11 बजे रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। आखिरी संपर्क: उड़ान भरने के करीब 23 मिनट बाद पायलट ने खराब मौसम के कारण रास्ता बदलने (Weather Deviation) का अनुरोध किया। इसके तुरंत बाद रडार से संपर्क टूट गया। मलबे की बरामदगी: विमान का मलबा चतरा जिले के सिमरिया के पास घने जंगलों में पाया गया। Hindustan Times जांच पर असर: ब्लैक बॉक्स न होने के कारण विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को अब केवल इन आधारों पर निर्भर रहना होगा: ATC लॉग्स: एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पायलट के बीच हुई आखिरी बातचीत के रिकॉर्ड। भौतिक साक्ष्य: दुर्घटनास्थल से मिले इंजन और मलबे के टुकड़ों की फॉरेंसिक जांच। मौसम विश्लेषण: उस समय के वायुमंडलीय आंकड़ों की विस्तृत रिपोर्ट। ब्लैक बॉक्स की अनुपस्थिति में यह पता लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा कि आखिरी पलों में विमान के अंदर क्या तकनीकी खराबी आई थी या पायलट ने क्या कदम उठाए थे। NDTV FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation ट्रंप का ‘सोमाली लुटेरा’ वाला तंज: इल्हान उमर ने सदन में राष्ट्रपति को कहा ‘झूठा’ कॉर्पोरेट इंडिया में लीडरशिप संकट: सहमे हुए मिलेनियल्स और बेरुखी दिखाते जेन-जी, कौन संभालेगा कमान?