हंसलपुर (गुजरात): मारुति सुजुकी के गुजरात प्लांट स्थित रेलवे साइडिंग को कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों के लिए वैश्विक मान्यता मिली है। यह उपलब्धि न केवल मारुति के लिए, बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए भी गर्व का विषय है।

मुख्य विवरण और कार्बन क्रेडिट:

  • 1.7 लाख कार्बन क्रेडिट: इस प्रोजेक्ट के माध्यम से वित्त वर्ष 2023-24 से 2032-33 के बीच लगभग 1.7 लाख कार्बन क्रेडिट उत्पन्न होने की उम्मीद है। Maruti Suzuki Official के अनुसार, वाहनों के डिस्पैच को सड़क मार्ग से हटाकर रेल मार्ग पर ले जाने से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
  • मोडल शिफ्ट क्या है?: परिवहन के एक माध्यम (जैसे सड़क) से दूसरे अधिक पर्यावरण अनुकूल माध्यम (जैसे रेल) पर शिफ्ट होना ‘मोडल शिफ्ट’ कहलाता है। यह सड़क पर भीड़भाड़ कम करने और जीवाश्म ईंधन की खपत घटाने में मदद करता है।
  • वैश्विक मानक: उत्सर्जन में कटौती की गणना UNFCCC के ‘क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म’ (CDM) ढांचे के तहत की गई है। स्वतंत्र सत्यापन के बाद, Verra अपने VCS प्रोग्राम के तहत कार्बन क्रेडिट जारी करेगा। Economic Times

प्रबंधन का बयान:

मारुति सुजुकी के एमडी और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने कहा, “यह हमारे लिए गर्व का क्षण है। सड़क से रेल मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को स्थानांतरित करके, यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे परिचालन दक्षता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी एक साथ चल सकती हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह पहल भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। Business Today

महत्वपूर्ण उपलब्धियां:

  1. बड़ी संख्या में डिस्पैच: मार्च 2023 में परिचालन शुरू होने के बाद से गुजरात रेलवे साइडिंग से 6 लाख से अधिक वाहन भेजे जा चुके हैं।
  2. भारत की पहली इन-प्लांट साइडिंग: गुजरात के हंसलपुर सुविधा में भारत की पहली ऑटोमोबाइल इन-प्लांट रेलवे साइडिंग का उद्घाटन मार्च 2024 में हुआ था।
  3. मानेसर का विस्तार: जून 2025 में मारुति सुजुकी की मानेसर सुविधा में भारत की सबसे बड़ी इन-प्लांट रेलवे साइडिंग शुरू की गई थी।

यह प्रोजेक्ट संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (जैसे जलवायु कार्रवाई और आर्थिक विकास) में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

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